Vaibhav Sooryavanshi की कामयाबी के चक्कर में पिता हुए थे बेरोज़गार, जानें किस तरह 15 साल का बच्चा बना सुपरस्टार

By rishabhpandey

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Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story

Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story: 15 साल की उम्र में क्रिस गेल जैसा रिकॉर्ड तोड़ना कोई मामूली बात नहीं है और जब यह कारनामा दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग में हो तो हर कोई हैरान रह जाता है। सिर्फ 29 गेंदों में 97 रन, 12 गगनचुंबी छक्के और पूरे क्रिकेट जगत में वैभव सूर्यवंशी के नाम की गूंज होना कोई मामूली बात नहीं है।

बिहार में समस्तीपुर जिले के ताजपुर का रहने वाला यह लड़का आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। सिंपल परिवार से आने वाले वैभव के पास बड़े शहरों जैसी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन उनके पास एक बड़ा सपना जरूर था क्रिकेट में नाम कमाने का और इस सपने को पूरा करने के लिए सिर्फ वैभव ने ही मेहनत नहीं की, बल्कि उनके पिता ने भी अपनी पूरी जिंदगी बेटे के भविष्य के लिए समर्पित कर दी।

Vaibhav Sooryavanshi Story: कहां से वैभव ने क्रिकेट खेलना शुरू किया?

Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story
Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story (Source: Social Media)

वैभव ने बहुत छोटी उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। जब दूसरे बच्चे खिलौनों में व्यस्त रहते थे, तब वह अपने पिता संजीव के साथ बल्ला और गेंद लेकर मैदान में उतर जाते थे। उनके पिता रोज उन्हें प्रैक्टिस करवाते थे और उन्होंने घर के पीछे एक छोटी सी पिच भी तैयार करवाई थी ताकि बेटे की ट्रेनिंग कभी न रुके।

Vaibhav Sooryavanshi Cricket: वैभव के पिता ने पूरा किया सपना

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Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story (Source: Social Media)

संजीव खुद भी क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उस समय बिहार को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली थी। जिसकी वजह से उनका सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि जो सपना वह पूरा नहीं कर पाए, उसे उनका बेटा जरूर पूरा करेगा। फिर उन्होंने बेहतर ट्रेनिंग के लिए वैभव को समस्तीपुर की क्रिकेट अकाडमी में भेजा। वहां कोच ब्रजेश झा ने उनकी एबिलिटी को निखारा, इसके बाद वैभव पटना पहुंचे, जहां कोच मनीष ओझा ने उनके खेल को और बेहतर बनाया।

हालांकि इस सफर में सबसे बड़ी मुश्किल पैसों और दूरी की थी। ताजपुर से पटना की दूरी करीब 75 किलोमीटर थी, इसके बावजूद उनके पिता हर दूसरे दिन उन्हें ट्रेनिंग के लिए लेकर जाते थे। जब खर्च बढ़ने लगे, तो बेटे के सपने को जिंदा रखने के लिए पिता ने अपनी जमीन तक बेच दी। एक पिता जिसने खुद अपने सपने अधूरे छोड़ दिए, लेकिन बेटे के सपने को कभी टूटने नहीं दिया। आज जब वैभव मैदान पर बड़े-बड़े छक्के लगाते हैं, तो वह सिर्फ रन नहीं बनाते, बल्कि अपने पिता के त्याग और संघर्ष का सम्मान करते हैं।

Vaibhav Sooryavanshi Performance: कैसी थी वैभव सूर्यवंशी की परफॉर्मेंस

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Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story (Source: Social Media)

आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले में वैभव ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए 29 गेंदों में 97 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 5 चौके और 12 छक्के शामिल थे, इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने के मामले में क्रिस गेल का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। इतना ही नहीं, वह ऑरेंज कैप की रेस में भी सबसे आगे पहुंच गए।

Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story: वैभव की सफलता बनी उनकी नई पहचान

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Vaibhav Sooryavanshi Struggle Story (Source: Social Media)

15 साल की उम्र में ऐसा प्रदर्शन क्रिकेट इतिहास में बहुत कम देखने को मिला है। आज बिहार में उनका पुश्तैनी घर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। घर को गुलाबी रंग से सजाया गया है, जो अब उनकी सफलता की नई पहचान बन गया है। लेकिन उस घर की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी दीवारों में नहीं, बल्कि उस संघर्ष में है जिसे एक पिता और बेटे ने मिलकर जिया है।

वैभव सूर्यवंशी की कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है। यह मेहनत, विश्वास, सपनों और परिवार के त्याग की ऐसी कहानी है, जो हर किसी को प्रेरित करती है। क्योंकि कई बार एक बेटे की सफलता के पीछे, एक पिता अपनी पूरी जिंदगी लगा देता है और यही वजह है कि कहा जाता है “सफलता हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती।”

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