Tejasvi Jaiswal Comeback: यशस्वी जायसवाल भले ही खराब सेहत के चलते इस वक्त विजय हजारे ट्रॉफी से दूर हों, लेकिन उनके बड़े भाई तेजस्वी जायसवाल का बल्ला जमकर बोल रहा है। साल 2025 के आखिरी दिनों में तेजस्वी ने 50 ओवर क्रिकेट में अपना पहला अर्धशतक ठोक दिया है। इससे पहले 6 दिसंबर को सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उत्तराखंड के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने टी20 क्रिकेट में भी पहली फिफ्टी लगाई थी। इतना ही नहीं, हाल ही में रणजी ट्रॉफी में भी उनके बल्ले से अर्धशतक निकल चुका है। 30 साल की उम्र में तेजस्वी अब हर फॉर्मेट में खुद को साबित कर रहे हैं।
Tejasvi Jaiswal Comeback: भाई के लिए दिया बलिदान

यशस्वी जायसवाल आज भारतीय क्रिकेट का बड़ा नाम बन चुके हैं, लेकिन इस सफर के पीछे उनके बड़े भाई का बड़ा त्याग छुपा है। साल 2012 में भदोही से निकले जायसवाल ब्रदर्स क्रिकेटर बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे थे। हालात इतने मुश्किल थे कि दोनों भाई आजाद मैदान में ग्राउंड्समैन के टेंट में रहकर प्रैक्टिस करते थे। परिवार की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि दोनों का क्रिकेट खर्च उठाया जा सके, इसलिए किसी एक को ही आगे बढ़ाना जरूरी था।

इसी वजह से तेजस्वी ने 17 साल की उम्र में क्रिकेट छोड़ने का मुश्किल फैसला लिया, ताकि यशस्वी का सपना जिंदा रह सके। यशस्वी ने भी अपने भाई के इस बलिदान को कभी बेकार नहीं जाने दिया और एज ग्रुप क्रिकेट में लगातार रिकॉर्ड बनाते चले गए। उधर तेजस्वी दिल्ली चले गए, जहां वह साउथ एक्सटेंशन में सजावटी लाइट्स की दुकान पर सेल्समैन का काम करने लगे। वहीं से वह यशस्वी को पॉकेट मनी भेजते थे और घर की जिम्मेदारियां संभालते थे। उन्होंने अपनी दोनों बड़ी बहनों की शादी भी कराई।
30 की उम्र में की वापसी

तेजस्वी ने खुद बताया है कि क्रिकेट छोड़ना उनके लिए आसान नहीं था। मुंबई में खेलते वक्त उन पर उम्र को लेकर सवाल उठे, जिसकी वजह से उन्हें लंबे समय तक बेंच पर बैठना पड़ा। ऊपर से पैसों की तंगी थी और दोनों भाइयों के लिए मुंबई में रहना बेहद मुश्किल हो गया था। आखिरकार तेजस्वी भदोही लौट आए और क्रिकेट उनसे काफी दूर हो गया। लेकिन किस्मत ने दूसरा मौका दिया। यशस्वी के आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट के बाद हालात सुधरे और उनके कहने पर तेजस्वी ने फिर से क्रिकेट पकड़ा। त्रिपुरा से खेलने गए तेजस्वी ने लंबे गैप के बाद वापसी की और आज डोमेस्टिक क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। 30 की उम्र में तेजस्वी जायसवाल की यह कहानी अब जज्बे और संघर्ष की मिसाल बन चुकी है।
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