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कश्मीरी खिलाड़ी ने हेलमेट में लगाया फिलिस्तीन का झंडा, मैनेजमेंट ने टूर्नामेंट से किया बाहर

By Rahul Singh Karki

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Kashmiri Player with Palestine Flag

Kashmiri Player with Palestine Flag: जम्मू–कश्मीर चैंपियंस लीग अचानक एक बड़े विवाद की वजह से चर्चा में आ गई है। लीग मैच के दौरान एक कश्मीरी खिलाड़ी की हरकत ने ऐसा बवाल खड़ा कर दिया कि मामला सीधे पुलिस और जांच एजेंसियों तक पहुंच गया। इस खिलाड़ी ने मैदान पर उतरते वक्त अपने हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा लगा रखा था। जैसे ही यह बात सामने आई, टूर्नामेंट मैनेजमेंट हरकत में आया और कुछ ही समय में सख्त फैसला ले लिया गया।

Kashmiri Player with Palestine Flag: हेमलेट पर लगाया फिलिस्तीन का झंडा

Kashmiri Player with Palestine Flag
Kashmiri Player with Palestine Flag

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला क्रिकेटर फुरकान भट्ट से जुड़ा है। मैच के दौरान उनके हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा नजर आया, जिसके बाद सवाल उठने लगे। देखते ही देखते यह मुद्दा तूल पकड़ गया और पुलिस तक जा पहुंचा। विवाद बढ़ने के बाद जांच एजेंसियों ने भी इस पर ध्यान दिया। इसके बाद टूर्नामेंट मैनेजमेंट ने Furqan Bhat को जम्मू–कश्मीर चैंपियंस लीग से बाहर कर दिया। रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज हो सकती है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि वो अभी जांच कर रही है और सबूतों के आधार पर एक्शन लिया जाएगा।

मैनेजर ने किया खुद का बचाव

Kashmiri Player with Palestine Flag
Kashmiri Player with Palestine Flag

वहीं, इस पूरे विवाद पर टीम मैनेजर ने खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्हें खिलाड़ी की इस हरकत की कोई जानकारी नहीं थी। उनका दावा है कि बिना बताए खिलाड़ी ने ऐसा किया, जिससे टूर्नामेंट की छवि को नुकसान पहुंचा। जानकारी के मुताबिक, Furqan Bhat इससे पहले भी एक दूसरे टूर्नामेंट में इसी तरह हेलमेट पर फिलिस्तीन का झंडा लगाकर खेल चुके हैं, लेकिन तब मामला इतना आगे नहीं बढ़ा था।

Kashmiri Player with Palestine Flag
Kashmiri Player with Palestine Flag

बताया जा रहा है कि जम्मू–कश्मीर चैंपियंस लीग में कुल 10 टीमें हिस्सा ले रही थीं और टूर्नामेंट का कुल इनामी राशि करीब 10 लाख रुपये थी। यह एक निजी टूर्नामेंट था, जिसकी जानकारी न तो जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन को थी और न ही पुलिस को पहले से दी गई थी। लोकल पब्लिक की एंट्री भी इसमें नहीं थी। कानूनी जानकारों का कहना है कि खेल आयोजनों में इस तरह के झंडे या प्रतीक इस्तेमाल करना पहले भी विवाद का कारण बन चुका है और अब इस मामले में आयोजकों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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