उस मैच में युवराज गज़ब के आत्मविश्वास में दिखे। गेंद कहीं भी पड़ रही थी, वह स्टैंड में जा रही थी। ब्रॉड उस समय बहुत युवा थे । युवराज के लिए वह ओवर उनके करियर का सुनहरा पल बन गया, जबकि ब्रॉड के लिए यह एक ऐसा झटका था जिसे वे कभी भूल नहीं पाए।
हालांकि, यही क्रिकेट की खूबसूरती है। एक खिलाड़ी के लिए जो पल जीत बनता है, वही दूसरे के लिए सीख बन जाता है। समय के साथ यही ओवर ब्रॉड की जिंदगी का एक अहम मोड़ साबित हुआ।
सालों बाद स्टुअर्ट ब्रॉड ने खुद माना कि वह ओवर उनके करियर का सबसे मुश्किल पल था। उन्होंने बताया कि उस मैच के लिए उनकी तैयारी ठीक नहीं थी। इंग्लैंड की टीम पहले ही टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी थी, मैच का कोई खास असर नहीं था और खिलाड़ी मानसिक रूप से भी थके हुए थे।
ब्रॉड उस समय बहुत युवा थे और अनुभव की कमी साफ दिखी। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह सही सोच के साथ मैदान में नहीं उतरे। उन्हें यह भी ठीक से पता नहीं था कि कौन सी गेंद फेंकनी है, फील्ड कहाँ है और उनका फोकस पूरी तरह भटका हुआ था। युवराज जैसे खिलाड़ी के सामने ऐसी गलती भारी पड़नी ही थी।
लेकिन यहीं से ब्रॉड ने खुद को बदलने का फैसला किया। उन्होंने इस हार को दिल पर लेने के बजाय इससे सीखने की ठानी। उन्होंने अपनी तैयारी, सोच और रवैये पर काम किया। उन्होंने एक सिस्टम बनाया, जिसमें मैच से पहले की तैयारी, मैदान पर शरीर की भाषा और मुश्किल हालात में खुद को संभालना शामिल था।
Stuart Broad ने माना कि ज़्यादातर खिलाड़ी ऐसी सीख अपने करियर के आखिरी हिस्से में लेते हैं, लेकिन उन्हें यह सब बहुत जल्दी समझ आ गया। यही वजह रही कि वह आगे चलकर इंग्लैंड के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज़ों में से एक बने और टेस्ट क्रिकेट में 600 से ज्यादा विकेट लिए।
उन्होंने बेन स्टोक्स का उदाहरण भी दिया, जिनके खिलाफ 2016 के टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में लगातार चार छक्के लगे थे। Stuart Broad ने कहा कि ऐसे पल किसी भी खिलाड़ी को तोड़ सकते हैं, लेकिन मजबूत खिलाड़ी वही होता है जो वापसी करता है। स्टोक्स ने भी वही किया और बाद में शानदार करियर बनाया।
अंत में ब्रॉड ने यही कहा कि भले ही वह ओवर उनके लिए बहुत दर्दनाक था, लेकिन अगर वह न होता तो शायद वह कभी खुद को इतना बेहतर बनाने की कोशिश नहीं करते। कभी-कभी जिंदगी और खेल में ऐसे झटके ज़रूरी होते हैं, जो इंसान को मजबूत बनाते हैं।
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