उन्होंने मिसाल पेश की: रोहित शर्मा की कप्तानी पर बोले राहुल द्रविड़

By Anjali Maikhuri

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Rahul Dravid on Rohit Sharma Captaincy

Rahul Dravid on Rohit Sharma Captaincy: भारत के पूर्व मुख्य कोच Rahul Dravid ने हाल ही में Rohit Sharma की कप्तानी को लेकर खुलकर बात की। द्रविड़ ने बताया कि रोहित जैसे कप्तान के साथ काम करना उनके लिए काफी आसान रहा, क्योंकि Rohit Sharma खुद बदलाव के लिए तैयार थे और टीम के सामने उदाहरण बनकर खड़े होते थे। जब कप्तान खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेता है, तो टीम तक संदेश पहुंचाने में कोच को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती।

Rahul Dravid on Rohit Sharma Captaincy

Rohit Sharma
Rohit Sharma

Rohit Sharma हमेशा से टीम में अपने मज़ाकिया अंदाज़ और खिलाड़ियों के साथ अच्छे रिश्तों के लिए जाने जाते हैं। इसी वजह से खिलाड़ी उनसे खुलकर बात कर पाते थे। द्रविड़ ने कहा कि जब रोहित खुद कहते थे कि “मैं टीम के लिए अपने खेल में बदलाव करूंगा, भले ही इससे मेरे रन या औसत पर असर पड़े,” तो बाकी खिलाड़ियों को भी वही रास्ता अपनाने की प्रेरणा मिलती थी। एक कप्तान अगर खुद जोखिम लेने को तैयार हो, तो पूरी टीम उसका साथ देती है।

द्रविड़ और रोहित की जोड़ी ने मिलकर भारतीय टीम को आगे बढ़ाया और इसी सोच का नतीजा 2024 का टी20 वर्ल्ड कप रहा, जिसे भारत ने अमेरिका में जीता। द्रविड़ ने साफ कहा कि रोहित ने सिर्फ बात नहीं की, बल्कि खुद करके दिखाया।

Rahul Dravid on Rohit Sharma Captaincy: बदलते क्रिकेट में रोहित की नई बल्लेबाज़ी और द्रविड़ की सोच

Rahul Dravid
Rahul Dravid (Source: Social Media)

 

राहुल द्रविड़ ने बताया कि रोहित शर्मा बहुत जल्दी समझ गए थे कि सफेद गेंद का क्रिकेट अब पहले जैसा नहीं रहा। पिछले दस सालों में खेल की रफ्तार तेज हो गई है। रन तेजी से बन रहे हैं, खिलाड़ी ज्यादा जोखिम ले रहे हैं और स्ट्राइक रेट बहुत अहम हो गया है। ऐसे में भारत को भी अपने खेल में बदलाव करना ज़रूरी था।

Rahul Dravid on Rohit Sharma Captaincy:
Rahul Dravid on Rohit Sharma Captaincy:

रोहित पहले से ही एक शानदार बल्लेबाज़ थे। 2019 वर्ल्ड कप में उन्होंने पांच शतक लगाए थे, लेकिन उस समय जिस अंदाज़ से वे खेलते थे, उसे अब और आक्रामक बनाने की जरूरत थी। द्रविड़ के मुताबिक रोहित ने इस बात को खुले दिल से स्वीकार किया और खुद अपने खेल में बदलाव किया। उन्होंने पारी की शुरुआत में ज्यादा आक्रामक खेलने की जिम्मेदारी ली ताकि टीम को तेज शुरुआत मिल सके।

द्रविड़ ने यह भी कहा कि कोचिंग कभी एक जैसी नहीं रह सकती। जो तरीका पहले काम करता था, जरूरी नहीं कि आज भी वही चले। उन्होंने अपने कोच केकी तारापोर का उदाहरण दिया, जो हमेशा गेंद को जमीन पर खेलने की सीख देते थे। उस दौर में यह सही था, लेकिन आज के टी20 क्रिकेट में सिर्फ जमीन पर खेलना काफी नहीं है।

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