MS Dhoni को रिटायर हो जाना चाहिए? Ravichandran Ashwin ने दिया बड़ा बयान

By Anjali Maikhuri

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MS Dhoni

MS Dhoni Role in CSK: CSK में MS Dhoni की अहमियत पर फिर से चर्चा तेज हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है Sanju Samson का टीम में आना। अब CSK के पास एक ऐसा विकेटकीपर है जो धोनी की जगह ले सकता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या इसका मतलब है कि “थाला” अब प्लेइंग इलेवन से बाहर हो जाएंगे? या फिर उनका रोल बदल जाएगा?

MS Dhoni Role in CSK: धोनी की जगह और नई बहस

MS Dhoni Role in CSK
MS Dhoni Role in CSK

धोनी ने 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन IPL में वो अभी भी खेल रहे हैं। 44 साल की उम्र में भी उनका फिटनेस और गेम के प्रति जुनून साफ दिखता है। वो अक्सर रांची में अकेले प्रैक्टिस करते हुए नजर आते हैं।

अब जब सैमसन टीम में आ गए हैं, तो ये बहस और दिलचस्प हो गई है कि धोनी को किस रोल में खेलना चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि IPL 2026 में धोनी को “इम्पैक्ट प्लेयर” के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि वो सिर्फ जरूरत के समय ही मैदान पर आएं।

Sanju Samson
Sanju Samson

लेकिन Ravichandran Ashwin इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि अगर धोनी टीम में हैं, तो उन्हें प्लेइंग इलेवन में होना चाहिए। अगर वो नहीं खेलना चाहते, तो फिर पूरा सीजन नहीं खेलना चाहिए।

वहीं AB de Villiers का भी मानना है कि धोनी अब CSK के टॉप-6 बल्लेबाज नहीं रहे। उनके हिसाब से या तो धोनी ऊपर बल्लेबाजी करें या फिर टीम में न खेलें।

MS Dhoni Role in CSK: अनुभव ही सबसे बड़ी ताकत

Ruturaj Gaikwad
Ruturaj Gaikwad

भले ही अब धोनी पहले जैसे बल्लेबाज न रहे हों, लेकिन उनका अनुभव अभी भी टीम के लिए बहुत जरूरी है। CSK के कप्तान Ruturaj Gaikwad के लिए धोनी एक गाइड की तरह हैं। मैदान पर उनकी मौजूदगी टीम को सही दिशा देती है।

पिछले सीजन में धोनी ज्यादातर 7वें या 8वें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए थे। कई बार टीम की शुरुआत खराब होने पर उन्हें जल्दी आना पड़ा। लेकिन इस बार सैमसन के आने से टॉप ऑर्डर मजबूत हुआ है, जिससे धोनी को अंत में खेलने का मौका मिल सकता है।

अश्विन का मानना है कि धोनी का असली रोल बल्लेबाजी से ज्यादा विकेटकीपिंग, फील्ड सेटिंग और गेंदबाजों को गाइड करना होगा। वो टीम के “बड़े भाई” की तरह काम करेंगे।

धोनी पिछले तीन महीनों से लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं, जो ये दिखाता है कि उनमें अभी भी खेलने का जज्बा है। अगर वो खुद मानते हैं कि वो टीम के लिए योगदान दे सकते हैं, तो उन्हें सिर्फ इम्पैक्ट प्लेयर बनाकर सीमित करना सही नहीं होगा।

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